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नेहरू संस्मारक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन 2014 के बारे में

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू की 125 वीं जयंती के अवसर पर एक सम्मेलन का आयोजन किया था। भारत के राजनैतिक इतिहास में यह एक ऐसा अवसर था जब एक व्यक्ति और एक अन्तरराष्ट्रीय राजनेता के रूप में नेहरू के बारे में एक बार पुनः चर्चा करना समीचीन समझा गया। भारत और विश्व के समक्ष उपस्थित वर्तमान चुनौतियों के संदर्भ में नेहरू और उनके युग को और अधिक गहराई से समझने की आवश्यकता है। यही कारण है कि उनकी 125वीं जन्म जयंती के अवसर को आज की जटिल घरेलू और बाहरी चुनौतियों को नेहरू के वैश्विक दृष्टिकोण के आलोक में देखने के लिए समयोचित समझा गया।

धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, समावेशी विकास, सशक्तीकरण, शिक्षा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे विषयों पर नेहरू के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। इस सम्मेलन ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में नेहरू की विचारधारा और उनकी विरासत के बारे में एक बार फिर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

इस अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विख्यात नेताओं, नोबल पुरस्कार विजेताओं, विचारकों, दार्शनिकों, प्रमुख राजनैतिक दलों और शांति तथा विकास कार्यों में संलग्न नागरिक समाज के संगठनों का नेतृत्व करने वाले प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था। सम्मेलन में भारत तथा वर्तमान विश्व व्यवस्था में सामाजिक समावेशन और सशक्तीकरण पर नेहरू के विचारों के बारे में चर्चा की गई। सम्मेलन का समापन एक घोषणा के साथ हुआ जिसमें विचार-विमर्श का सार प्रस्तुत किया गया और वैश्विक महत्व का संदेश दिया गया।