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नेहरू के बारे में लेख और भाषण



श्रद्धांजलि पर्ल एस. बक
इस पृथ्वी पर मानव जीवन की हर शताब्दी में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो हम सभी के जीवन पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं। जवाहरलाल नेहरू एक ऐसे ही व्यक्ति थे। अपने समय के किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में उन्होंने अधिक समय तक पूर्व में और पश्चिम में हमारे जीवन को प्रभावित किया, और सदैव हमारे हित की दृष्टि से प्रभावित किया। यहाँ तक कि जब ऐसे लोग उनकी अनुचित आलोचना कर रहे थे जो उन्हें नहीं समझे थे, तब भी उनका प्रभाव जारी रहा। नतीजा यह हुआ कि दुनिया भर में अपने स्वतंत्र विचारों के लिए उन्हें सम्मान मिला और अपनी सत्यनिष्ठा और व्यक्तिगत गुणों के लिए सभी ने उनके प्रति प्रेम प्रदर्शित किया।

वे आजीवन नेतृत्वकर्ता थे। मुझे याद है कि उनके प्रति मेरे मन में उनके प्रति सम्मान का भाव तभी से था जब वे गाँधी के युवा अनुयायी हुआ करते थे। मैं महात्मा गाँधी का प्रशंसक था, लेकिन मैं गाँधीजी जैसे महान व्यक्ति की ताकत से भली भांति परिचित हूँ, और मुझे हैरानी यह देख कर होती कि किस प्रकार जवाहरलाल नेहरू, जो हालाँकि युवा थे, किस प्रकार अपने से बड़े महात्मा गाँधी के प्रति प्रगाढ़ प्रेम और आदर का भाव बनाए रखते हुए भी अपने विचारों की स्वतंत्रता को बरकरार रखते थे। दूसरों का सम्मान बनाए रखते हुए भी अनधीन रहना महानता का ऐसा लक्षण था जो आने वाले वर्षों में बड़ी स्पष्टता के साथ और बड़े सशक्त रूप में उजागर होने वाला था।

निश्चित तौर पर मैंने अपने देश के उन नेताओं की आलोचना की है जिन्होंने समय-समय पर नेहरू के प्रति अपनी समझ का अभाव प्रदर्शित किया है। लेकिन मैंने पाया है कि उन्होंने कभी इन बातों का प्रतिकार नहीं किया या कभी कड़वाहट व्यक्त नहीं की जो उनकी महानता को दर्शाता है। इस दौरान के वर्षों में यह सिद्ध हो गया है कि उनका राजनैतिक दृष्टिकोण सही था। उनके नेतृत्व में भारत ने पूर्व और पश्चिम के बीच एक सेतु राष्ट्र की भूमिका निभाई जहाँ भारत के लोग दोनों ही पक्षों के हित की भाषा बोलते हैं। मानव जाति के इतिहास के सबसे कठिन दौर में नेहरू ने दृढ़तापूर्वक अपने देशवासियों को एकजुट रखने में सफलता हासिल की और उनकी विविधता को सम्पूर्ण राष्ट्र के रूप में एक किया – एक ऐसा राष्ट्र जो मेरे विचार से आने वाली कई सदियों तक दृढ़ता से खड़े रहने की क्षमता रखता है।

मैं नेहरू के स्वभाव की दूसरी खूबियों को भूला नहीं हूँ, उनका आकर्षण, उनकी प्रतिभा, उनकी शैली और उनका सभ्य व्यवहार। मैं जानता हूँ कि यदि हमारे इस युग में अधिक शांति होती तो वे एक बहुत सफल सृजनशील लेखक बन सकते थे, क्योंकि उनकी लेखन शैली विशिष्ट थी और उनकी कल्पना जीवन्त और सजीव थी। मुझे उन पुस्तकों के न लिखे जाने का दुख है जिन्हें वे लिख सकते थे यदि उन्होंने अपनी प्रतिभा को देश में राजनीतिक जीवन के लिए समर्पित न कर दिया होता। उन्होंने जो थोड़ी सी पुस्तकें लिखी है, और वे सभी बुनियादी तौर पर महत्वपूर्ण हैं, उनके लिए मैं उनका आभार मानता हूँ। लेकिन मैं मानता हूँ कि यह बात सही है कि भारत को उनकी लिखी पुस्तकों से कहीं ज़्यादा दिन-प्रतिदिन के कामकाज में उनके नेतृत्व की अधिक आवश्यकता थी।

जवाहरलाल नेहरू हर दृष्टि से अविस्मरणीय हैं। उन्होंने गाँधी की छाया में अपने जीवन की शुरुआत की, लेकिन जल्दी ही वे उस छाया से बाहर निकल कर अपने युग के पूरे प्रकाश में आ गए और वहाँ वे रहे और हमेशा रहेंगे, न केवल आधुनक भारत के महानतम व्यक्ति के रूप में बल्कि विश्व स्तर पर भी सच्चे अर्थ में कुछ गिने-चुने महान लोगों में से एक बन कर रहेंगे। मैं इसे अपने लिए एक बड़े सौभाग्य की बात मानता हूँ कि मुझे उनसे रूबरू मुलाकात करने और उनकी आवाज़ को सुनने का अवसर मिला।