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कार्टून

“मुझे मत बख्शना शंकर”

...एक सच्चा कार्टूनिस्ट सिर्फ मज़ाक ही नहीं उड़ाता है बल्कि किसी घटना के आंतरिक महत्व को समझकर अपनी कूँची के कुशल प्रयोग से उस घटना के महत्व को दूसरों को समझा देता है। शंकर के पास यह असाधारण प्रतिभा है जो दूसरे देशों की तुलना में भारत में कम पाई जाती है, और किसी प्रकार की दुर्भावना या द्वेष के बिना वे किसी कुशल कलाकार की तरह वे सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोगों की कमज़ोरियों और अवगुणों को उजागर कर देते हैं। हम सभी को उनकी इस सेवा के लिए उनका आभार मानना चाहिए। गर्वित हो जाना या आत्म-केंद्रित होना हमारी कमज़ोरी होती है और इसलिए यही बेहतर है कि समय-समय पर हमारे दंभ के इस आवरण को कोई फाड़ता रहे। और इसीलिए शंकर को धन्यवाद देते हुए मुझे प्रसन्नता है और मैं आशा करता हूँ कि वे हमारी कमियाँ उजागर करके हमारा ज्ञान बढ़ाते रहेंगे और अपनी विनोदप्रियता से हमारा मन बहलाते रहेंगे और हमें विनम्रता का पाठ पढ़ाते रहेंगे।

जवाहरलाल नेहरू