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सम्मेलन घोषणा

"नेहरू का वैश्विक दृष्टिकोण और उनकी विरासत: लोकतंत्र, समावेश और सशक्तीकरण" विषयों पर आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वीकृत किया गया घोषणापत्र17-18 नवम्बर 2014 को नई दिल्ली
20 देशों, 29 राजनैतिक दलों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करने और "नेहरू का वैश्विक दृष्टिकोण और उनकी विरासत: लोकतंत्र, समावेश और सशक्तीकरण" विषय पर 17-18 नवम्बर 2014 को नई दिल्ली में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले हम प्रतिनिधिगण, जो जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती के अवसर पर उनके ऐतिहासिक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय योगदान के लिए उनका आभार प्रकट करते हुए और किसी भी प्रकार के आधिपत्य के खिलाफ उनके संघर्ष में उनका मार्गदर्शन करने वाले गुट-निरपेक्षता और शांति के सिद्धान्तों को संजोते हुए उनका पुण्य स्मरण करने के लिए समर्पित हैं।

प्रतिज्ञान करते हैं,
कि जवाहरलाल नेहरू द्वारा समर्थित लोकतंतत्र, समावेश और सशक्तीकरण के सिद्धान्तों की प्रासंगिकता चिरस्थायी है।
कि टकराव और हिंसा से जूझते वर्तमान विश्व को एक वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है।
कि एक बहुजातीय विश्व में लोकतंत्र, समावेश और सशक्तीकरण की धारणाएं भाई-भाई के बीच खूनी संघर्ष को रोकने और शांति तथा समझौते में सहायक हो सकती हैं।
कि आतंकवाद विश्व भर के सभी लोगों को समान रूप से प्रभावित करता है। अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को संगठित और प्रभावी ढंग से इस चुनौती का सामना करना चाहिए।
कि गुट-निरपेक्षता की मूल भावना ने विकासशील देशों को एकजुट करने में सहायता की और यह भावना समावेशी और वर्तमान समय की वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली नई विश्व व्यवस्था में उदीयमान और विकासशील देशों को एक साथ लाने में सहायता कर सकती है।
कि गुट-निरपेक्षता का सिद्धान्त विश्व राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने में भारत और विकासशील देशों की सहायता कर सकता है।
कि विश्व समुदाय को विभाजनकारी या समाज में टकराव उत्पन्न करने वाली प्रवृत्तियों से सावधान किया जाए।
कि एक ऐसी विश्व व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाए जो लोकतांत्रिक और बहुपक्षीय हो, जो एकपक्षवाद के बजाए सर्वसम्मति के सिद्धान्त पर आधारित हो।
कि संयुक्त राष्ट्र संघ की व्यवस्था को मज़बूत किया जाए और उसे सच्चे अर्थ में प्रतिनिधित्व आधारित बनाया जाए। सुधार की यह प्रक्रिया नई अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था में और संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन में परिलक्षित होनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न संस्थाओं में सुधार के लिए कार्य किया जाए ताकि अनेक नए देशों के प्रादुर्भाव सहित संयुक्त राष्ट्र के गठन के समय से अब तक हुए सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक बदलावों को शामिल किया जा सके।
धन और संसाधनों का अधिक न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय संस्थाओं सहित अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में सुधार किया जाए।
मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा बनने वाली जलवायु परिवर्तन और वैश्विक ताप वृद्धि की चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए एक अधिक न्यायसंगत रणनीति को बढ़ावा दिया जाए।

संकल्प लेते हैं,
कि हम निम्नलिखित के बारे में पुनः प्रतिज्ञान करते हैं,
शांति तथा अहिंसा का संदेश, विशेषतया विश्व के युवाओं, महिलाओं और सुविधावंचितों के लिए
पंचशील के पाँच सिद्धान्त।
पुनःस्मरण करते हैं कि पंचशील में निम्नलिखित की अपेक्षा की गई है,
एक दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और सम्प्रभुता के लिए परस्पर सम्मान
परस्पर अनाक्रमण।
एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना
परस्पर लाभ के लिए समानता और सहयोग और,
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व।
निम्नलिखित के लिए कार्य करने का संकल्प लेते हैं,
घृणा तथा हिंसा से मुक्त विश्व और अन्तरराष्ट्रीय मामलों में नेहरू की विरासत को आगे बढ़ाना।
परस्पर विश्वास, सहिष्णुता, सामंजस्य और मित्रता के आधार पर संगठित विश्व।
एक ऐसा विश्व जहाँ वैश्विक संसाधनों तक अधिक न्यायसंगत ढंग से पहुँच हो।
गरीबी, निरक्षरता, रोग, अन्याय और भूख के खिलाफ संघर्ष के लिए एकजुट विश्व।
परमाणु तथा अन्य प्रकार के जनसंहार के हथियारों से मुक्त विश्व
सार्वजनिक हित के साधन के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं तक सभी लोगों की पहुँच की गारंटी देना ताकि सभी के हित साधन के लिए एक विश्व अर्थव्यवस्था की स्थापना की जा सके।
वैश्विक परस्पर निर्भरता के ढाँचों को सुदृढ़ करने के लिए समुद्र, वायु, अन्तररिक्ष और साइबर आधारित प्रवाहों को सुरक्षित बनाना।
असमानताओं को दूर करने के लिए एक न्यायसंगत विश्व व्यवस्था का निर्माण।
नेहरू के लोकतंत्र, समावेश और सशक्तीकरण के संदेश को विश्व मंच तक पहुँचाना
एक ऐसा विश्व जहाँ प्रादेशिक सीमाएं अप्रासंगिक हों, जहाँ सांस्कृतिक सीमाएं समावेशी और सभी को समाहित करने वाली हों, और जहाँ स्थानीय मान्यताएं सार्वभौमिक मानवतावाद के महासागर में विलीन हो जाती हों।
अन्तरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भारतीयों को एक राष्ट्रीय पहचान प्रदान करने की नेहरू की विरासत को अक्षुण्ण रखना और उसे आगे बढ़ाना। यह सम्मेलन फिलिस्तीन के लोगों के स्वतंत्रता और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता के न्यायसंगत अधिकारों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करता है।

मानव जाति के प्रतिनिधियों के रूप में हम संकल्प लेते हैं कि हम पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा समर्थित मूल्यों का पोषण करेंगे, उनके दृष्टिकोण का अनुसरण करेंगे, उनकी विचारधारा को आत्मसात करके उनकी विरासत को समूचे विश्व तक ले जाएंगे, अपने सभी कार्यों में शांति को विशेष महत्व देते हुए हिंसा का त्याग करेंगे, विविध विचारों और संस्कृतियों का सम्मान करेंगे, और समावेश तथा सशक्तीकरण की परम्पराओं को बढ़ावा देंगे, सहिष्णुता, समानुभूति और प्रेम के माध्यम से हिंसक तथा अन्यायकारी शक्तियों का मत परिवर्तन करेंगे।