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नेहरू की प्रशंसा में

उनसे अधिक साहस किसी और में नहीं। देश के प्रति प्रेम में कौन उनसे श्रेष्ठ हो सकता है?...वे स्फटिक की भांति खरे हैं; उनकी सच्चाई संदेह से परे है। वे एक निर्भीक सूरमा हैं, बेदाग। उनके हाथों में राष्ट्र सुरक्षित है।
महात्मा गाँधी
(1869 – 1948) मोहनदास करमचंद गाँधी ब्रिटिश-शासित भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन के अग्रगण्य नेता थे।
युवा भारत के सिंहासन पर जवाहरलाल का निस्संदेह अधिकार है। उनका व्यक्तित्व प्रतापी है। उनका धीर निश्चय और साहस अदम्य है, लेकिन नैतिक सच्चाई और बौद्धिक सत्यनिष्ठा के प्रति उनकी अडिग निष्ठा उन्हें उनके साथियों से बहुत ऊँचा उठाती है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर
(1861 – 1941) रवीन्द्रनाथ टैगोर, जिन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है, एक बंगाली बहुज्ञ थे जिन्होंने 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों में बांग्ला साहित्य और संगीत के साथ-साथ भारतीय कला को प्रासंगिक आधुनकतावाद के संदर्भ में नए सिरे से गढ़ा।
इस अंतरंगता, निकटता, घनिष्ठता और भ्रातृ-सुलभ प्रेम के कारण मेरे लिए यह कठिन है कि मैं सामान्य जन के मूल्यांकन के लिए उनके व्यक्तित्व का सार प्रस्तुत करूँ, लेकिन राष्ट्र के आदर्श, देश के प्रधानमंत्री, और जन नायक, जिसका नेक चरित और महान उपलब्धियाँ एक खुली किताब हैं, के बारे में मेरे विवेचन की शायद ही कोई आवश्यकता है।
वल्लभभाई पटेल
(1875 – 1950) वल्लभभाई झावेरभाई पटेल एक भारतीय बैरिस्टर और राजनेता थे, वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक नेता थे और भारतीय गणतंत्र के संस्थापकों में से एक थे।
वे व्यक्ति की स्वतंत्रता के हिमायती थे लेकिन साथ ही वे आर्थिक समानता की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध थे। वे किसी के भी साथ समझौता करने से नहीं डरते थे, लेकिन उन्होंने कभी भी डर के कारण किसी के साथ समझौता नहीं किया।
अटल बिहारी वाजपेयी
(जन्म: दिसम्बर 25, 1924) अटल बिहारी वाजपेयी एक भारतीय राजनेता हैं जो भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री हुए, पहली बार 1996 में 13 दिन के लिए और फिर 1998 से 2004 तक प्रधानमंत्री रहे।
जवाहरलाल नेहरू एक उत्कृष्ट विद्वान और लेखक, उपनिवेशवाद के विरुद्ध एक जुझारू स्वतंत्रता सेनानी, अफ्रीका-एशिया की एकता और गुटनिरपेक्षता की नीति के अग्रणी योजनाकार थे। नस्लभेद के निकृष्टतम रूप – रंगभेद के खिलाफ़ सभी दक्षिण अफ्रीका वासियों के संघर्ष में वे एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में शामिल हैं।
नेल्सन मंडेला
(1918 – 2013) नेल्सन रोलिह्लाहला मंडेला दक्षिण अफ्रीकी रंगभेद विरोधी क्रांतिकारी, राजनीतिज्ञ और जन-सेवक थे जो 1994 से 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रहे।
एक महान विश्व नेता जो अपने युग में उन मूलभूत उच्चाकांक्षाओं के पक्ष में खड़े हुए जिनके लिए आज संयुक्त राज्य अमेरिका खड़ा है।
जॉन एफ. केनेडी
(1917 – 1963) अमेरिकी राजनेता जो संयुक्त राज्य अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति हुए।
उन्होंने विजय हासिल की और फिर वे अगले महत्वपूर्ण मुकाबले – द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति के लिए संघर्ष − की ओर आगे बढ़ गए। इस चरम संघर्ष में गाँधी उनके साथ नहीं थे, लेकिन उन्हें भारत की जनता का समर्थन हासिल था, जनता जो अब अपने गणतंत्र में स्वतंत्र हो चुकी थी।
मार्टिन लूथर किंग, जूनियर
(1929 – 1968) मार्टिन लूथर किंग, जूनियर एक अमेरिकी पादरी, आंदोलनकारी, मानवतावादी, और अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के नेता थे।
अहिंसा और असहयोग के माध्यम से आज़ादी की प्राप्ति के लिए गाँधी और आपके प्रयत्नों के लिए मेरे मन में आदर पहले से अधिक बढ़ गया है। बाहरी अत्याचार के दबाव के बावजूद निष्पक्ष तालमेल बनाए रखने के आंतरिक द्वंद्व और अपने अन्तर्मन में क्रोध और घृणा के वशीभूत होने से स्वयं को बचाने का यह संघर्ष दुनिया में अनूठा ही होगा।
अल्बर्ट आइंस्टीन
(1879 – 1955) अल्बर्ट आइंस्टीन जर्मनी में जन्मे सैद्धान्तिक भौतिकशास्त्री और वैज्ञानिक दार्शनिक थे। उन्होंने सापेक्षता का सामान्य सिद्धान्त विकसित किया जो आधुनिक भौतिकशास्त्र के दो आधार स्तंभों में से एक है।
नेहरू के बारे में लिखना कठिन है; समझ ही नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से की जाए। उन्होंने इतने सारे क्षेत्रों और क्षमताओं में इतना उत्कृष्ट कार्य किया है कि आज केवल उनके अपने देश में ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में उनकी विशिष्ट प्रतिष्ठा है...आज नेहरू का राजनैतिक रुतबा और उनका नेतृत्व बहुत ऊँचा है और उसे पूरा सम्मान प्राप्त है; लेकिन (विगत के) उन दिनों में भी वे इतने ही महान थे, और इतने ही मानवतावादी जितने वे सदैव रहे हैं। यही कारण है कि भारत के लाखों-लाखों लोग उनके प्रति इस कदर मुग्ध हैं।
लाल बहादुर शास्त्री
(1904 – 1966) लाल बहादुर शास्त्री भारतीय गणतंत्र के द्वितीय प्रधानमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे। शास्त्री 1920 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में शामिल हुए थे।
नेहरू विश्व शांति और वसुधैव कुटुम्बकम की धारणा में गहरी आस्था रखते थे। संयुक्त राष्ट्र अधिकारपत्र में नेहरू से बढ़कर किसी ने भी विश्वास और निष्ठा प्रदर्शित नहीं की है। उन्होंने इस बात को समझा था कि ताप-नाभिकीय हथियारों के इस युग में युद्ध से सभ्यता की सभी मान्यताओं का नाश हो जाएगा। इसीलिए उनका दृढ़ विश्वास था कि इस अस्त-व्यस्त विश्व में किसी राजनेता की सच्ची भूमिका तनावों और टकरावों को कम करने और तालमेल और आपसी समझौतों का वातावरण तैयार करने में निहित है ताकि अन्तरराष्ट्रीय विवादों को युद्ध की विभीषिका के बिना सुलझाया जा सके। कोरिया, लाओस, कांगो और वियतनाम जैसे अनेक अन्तरराष्ट्रीय विषयों पर उन्होंने शांति और मित्रता के पक्ष में अपनी आवाज़ उठाई, और उनकी आवाज़ को सदैव सम्मान के साथ सुना गया।
एस. राधाकृष्णन
(1888 – 1975) सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक भारतीय दार्शनिक और राजनेता थे जो भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और फिर 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति रहे।
मुझे पूरा विश्वास है कि विश्व अभिमत आज उन्हें जितना महत्व देता है इतिहास उन्हें इससे भी बढ़कर महत्व देगा।
लॉर्ड माउंटबेटन
(1900 – 1979) ब्रिटेन शासित भारत के अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल
भारत को नेहरू जैसे उत्कृष्ट नेता पर गर्व होना चाहिए जो अपने प्रयासों और दूरदर्शिता से भारत के बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं और शांति के लिए अपने अथक प्रयासों, सह-अस्तित्व के लिए अपनी प्रतिबद्धता और शांतिपूर्ण अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के लिए अपने प्रयासों के कारण वे समकालीन विश्व के उत्कृष्टतम राजनेताओं की पंक्ति में शामिल हो चुके हैं।
जोसिप ब्रोज़ टीटो
(1892 – 1980) यूगोस्लाव क्रांतिकारी और राजनेता, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति, 1953 - 80
नेहरू ने अपने देशवासियों को लोकतांत्रिक तौर-तरीकों के बारे में शिक्षित करने का प्रयास किया है। भारत जैसी बड़ी आबादी और उसकी अशिक्षा की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह एक बहुत बड़ा अभियान है। इसमें उनकी सफलता भी सिद्ध हो रही है, मैं मानता हूँ कि अकेले भारतीयों को ही नहीं बल्कि शेष विश्व की एक बड़ी आबादी को भी उनके नेतृत्व, उनकी सत्यनिष्ठा और साहस के लिए नेहरू का आभार मानना चाहिए।
एलिनोर रूज़वेल्ट
(1884 – 1962) एना एलिनोर रूज़वेल्ट एक अमेरिकी राजनीतिज्ञ थीं। वे मार्च 1933 से अप्रैल 1945 तक राष्ट्रपति के रूप में अपने पति फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट की राष्ट्रपति के रूप में चार कार्यकालों के दौरान सबसे लम्बे समय तक संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रथम महिला रहीं।
मुझे याद है कि कुछ वर्ष पहले, जब वे भारत के सर्वमान्य नेता नहीं थे जो वे बाद में बने, मैंने एक प्रमुख भारतीय नेता से पूछा था कि उनकी दृष्टि में महात्मा गाँधी के बाद दूसरा सबसे असाधारण नेता कौन है। उन्होंने जवाब दिया, “जवाहरलाल नेहरू।“ जब मैंने उनसे पूछा कि मैंने कुछ दूसरे नेताओं का भी उल्लेख किया था, लेकिन उन्होंने नेहरू को ही क्यों चुना, तो उनका जवाब था, “इसलिए क्योंकि नेहरू पर पूरी तरह भरोसा किया जा सकता है।
एस.डब्ल्यू.आर.डी. भंडारनायके
(1899 – 1959) सीलोन (अब श्रीलंका) के प्रधानमंत्री, 1956 - 59
नेहरू के साथ अपने परिचय से मैं स्वयं को एक बेहतर, अधिक जानकार और अधिक पूर्ण व्यक्ति अनुभव करता हूँ।
क्वामे एन्क्रूमाह
(1909 – 1972) घाना और उसके पूर्ववर्ती गोल्ड कोस्ट के प्रधानमंत्री 1951 - 66
सच्चाई यह है कि नेहरू केवल भारतीयों के दिलों की गहराइयों में बसने वाले सपनों का ही प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इसके साथ-साथ वे पूरी मानवता की अन्तरआत्मा को भी अभिव्यक्त करते हैं, खास तौर पर ऐसे लोगों की अन्तरआत्मा को व्यक्त करते हैं जिन्होंने कमोबेश उसी अनुभव को जिया है और उनकी समस्याओं का सामना किया है जिनका सामना भारतीयों ने किया है।
गमाल आब्देल नासेर
(1918 – 1980) मिस्र के राष्ट्रपति, 1956 से मृत्यु पर्यन्त
मैं समझ नहीं पा रहा कि पंडित नेहरू के बारे में क्या लिखूँ। गाँधी के बाद उन्हीं का नाम आता है जिससे भारत का बोध होता है – जो भारत है। ईश्वर की कृपा है कि हमें एक के बाद एक दादाभाई नारोजी, तिलक, गाँधी और जवाहरलाल जैसे नेता मिले हैं। यही प्रार्थना है कि हम ईश्वर की इस कृपा के लिए अपने आप को योग्य सिद्ध कर सकें।
विनोबा भावे
(1895 – 1982) महात्मा गाँधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी
गाँधीजी के साथ जवाहरलाल नेहरू का वही सम्बंध था जो हमारे राष्ट्रीय महाकाव्य में राम का लक्ष्मण के साथ है। मुझे अपने देशवासियों से इससे अधिक कुछ नहीं कहना है। जहाँ तक दूसरे देशों का सवाल है, इन देशों के राजनेता जवाहरलाल नेहरू को इस हद तक जानते और चाहते हैं कि भारत को उनसे ईर्ष्या होने लगे! – क्योंकि भारत नेहरू को अपने प्रियतम की तरह चाहता है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री साठ वर्ष पूरे कर चुके हैं। हमारे लिए इस बात पर विश्वास करना कठिन है। हमारे लिए तो वे चिरयुवा हैं।
सी. राजगोपालाचारी
(1878 – 1972) भारत के अन्तिम गवर्नर जनरल। राजनीतिज्ञ और लेखक।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मुख्यतः उन्हीं (नेहरू) की बदौलत ही साल दर साल हर महत्वपूर्ण अन्तरराष्ट्रीय मुद्दे पर, विशेषतः जब आज़ादी के लिए खतरा उत्पन्न हुआ या उपनिवेशवाद के कारण लोगों के दमन की चुनौती उत्पन्न हुई, साहसपूर्ण निर्णय ले सकी। इसके अलावा, यदि भारत राष्ट्रवाद की अवधारणा के प्रभाव से बच सका, जैसा कि उन्नीसवीं शताब्दी में यूरोप और अमेरिका में हुआ, तो वह भी नेहरू के ही कारण था; उन्होंने हमारे राष्ट्रवाद की अवधारणा को दृष्टि और विश्वव्यापी समावेश का विस्तार दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत की स्वतंत्रता से दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ्रीका के अन्य देशों में लोगों को स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए प्रेरणा मिली; और यह प्रेरणा प्रदान करने में नेहरू की प्रमुख भूमिका रही है।
पट्टाभि सीतारमैया
(1880 – 1959) आंध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले के गुंडुगोलानु गाँव में एक तेलुगु नियोगी ब्राह्मण परिवार में जन्मे डा. भोगराजु पट्टाभि सीतारमैया आंध्र प्रदेश राज्य में भारतीय स्वातंत्र्य के आन्दोलनकारी और राजनैतिक नेता थे।
अपने समय के अधिकांश राष्ट्रवादी नेताओं से अलग वे (नेहरू) औपनिवेशिक दासता के तले दबी मानवता की स्वतंत्रता का एक विश्वव्यापी दृष्टिकोण रखते थे और उन्होंने पश्चिम की बौद्धिक स्वतंत्रता को पूर्व की सांस्कृतिक अस्मिता के साथ मिलाया था। वे भारत के सामाजिक-राजनैतिक यथार्थ, उसके इतिहास की अच्छाइयों और कमज़ोरियों, और देहाती जनता के गहरे दुखों और अपने समय के राष्ट्रीय आन्दोलन के बारे में तर्क आधारित दृष्टिकोण रखते थे।
वी.आर. कृष्णा अय्यर
(जन्म: नवम्बर 1, 1915) न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्णा अय्यर के नाम से विख्यात वैद्यनाथपुरा रामा कृष्णा अय्यर भारत के उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं।
मैं आपसे मिलने के लिए इच्छुक था। यदि आप न आए होते तो मैं आपसे मिलने के लिए आता। आप शांति के वाहक हैं।
फिदेल कास्त्रो
(जन्म: अगस्त 13, 1926) सामान्यतया फिदेल कास्त्रो के नाम से जाने वाले फिदेल अलेजान्द्रो कास्त्रो रुज़ क्यूबा के एक सेवानिवृत्त कम्यूनिस्ट राजनीतिज्ञ और क्रांतिकारी हैं जो 1959 से 1976 तक क्यूबा के प्रधानमंत्री और फिर 1976 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे।
नेहरू विश्व शांति के समर्थक हैं, न्याय और स्वतंत्रता के सच्चे हिमायती हैं, और सकारात्मक निष्पक्षता के दृढ़ पक्षधर हैं।
शुक्री अल-कुवातली
(1891 – 1967) सीरिया के राष्ट्रपति 1955 - 58
नेहरू एशिया के महान क्रांतिकारी थे और आज भी हैं।
ली कुआन यू
(जन्म: 1923) सिंगापुर के प्रथम प्रधानमंत्री, 1959 - 90
नेहरू अपनी शताब्दी के महानतम राजनेताओं में से एक हैं।
चार्ल्स मलिक
(1906 – 1987) लेबनानी दार्शनिक और राजनयिक
आज एशिया में शक्ति का संतुलन नेहरू के छरहरे, संवेदनशील हाथों में है।
पैट्रिक गॉर्डन वॉकर
(1907 -1980) ब्रिटिश सांसद और हैरल्ड विल्सन के नेतृत्व में कैबिनेट मंत्री
नेहरू एक ऐसे शख्स हैं जो विगत और वर्तमान को भविष्य से जोड़ने वाला सेतु बनाना जानते हैं।
लुडविग एरहार्ड
(1897 – 1977) पश्चिम जर्मनी के चांसलर 1963 - 66