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सम्मेलन में भाषण

आयोजन समिति के संयोजक का स्वागत भाषण श्री आनन्द शर्मा
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की माननीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी,
पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह,
महामहिमो, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई,
घाना के श्री जॉन क्युफुअर,
नाइजीरिया के श्री ओल्युसेगुन ओबासांजो,
महारानी राजमाता दोरजी वांग्मो वांग्चुक,
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री श्री माधव नेपाल,
अरब लीग के नेता श्री आमरे मूसा,
महाप्रतिवेदक श्री मणिशंकर अय्यर,
आमंत्रितजन तथा मित्रो,

श्री मुकुल वासनिक और मैं यहाँ प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी श्री अहमद कथरादा और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबाजी को उनकी उपस्थिति के लिए धन्यवाद देते हैं।

एशिया, अफ्रीका और यूरोप से आए राजनैतिक दलों के प्रतिनिधिगण, महामहिमो, देवियो और सज्जनो,

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती के अवसर पर इस ऐतिहासिक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष, नेतृत्व और सदस्यों की ओर से आप सभी का स्वागत करते हुए मैं स्वयं को सम्मानित और गौरान्वित अनुभव कर रहा हूँ।

इस सम्मेलन में दुनिया भर से नेतागण एकत्र हुए हैं और हमें एक मंच मिला है कि हम भारत के एक उद्यमी सपूत, हमारे नेता और विश्वनेता के संघर्ष, त्याग और विराट योगदान को एक बार फिर याद करें।

जैसाकि हम सभी जानते हैं कि नेहरू भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन के निर्भीक सेनानी थे और उन्होंने इस देश के लाखों-लाख पराधीन लोगों के लिए एक निष्पक्ष और न्याययुक्त समाज बनाने के लिए निरन्तर संघर्ष किया। वे एक प्रेरणा थे, सहानुभूतिशील और दृढ़ विश्वास वाले साहसी नेता थे। वे मानव की गरिमा और स्वतंत्रता का भी प्रतीक थे। उन्होंने अपने पीछे एक महान विरासत छोड़ी है जिस पर हमें गर्व है। नेहरू ने हमें लोकतंत्र के रूप में सबसे बड़ी सौगात दी है। यह लोकतंत्र समावेशी है, भारत के बहुलतावादी समाज की प्रचुर विविधता को समाहित करने वाली है, और हमारे सभी लोगों को अधिकार देकर सशक्त बनाने वाली है।

जवाहरलाल नेहरू समानता और नागरिक अधिकारों में दढ़ विश्वास रखते थे और इनके लिए उन्होंने अपने दृढ़ विश्वासों से विचलित हुए बिना अनवरत संघर्ष किया। उनके दर्शन और सिद्धान्तों का सार भारतीय गणतंत्र के संविधान में प्रतिष्ठापित किया गया है जहाँ सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों का वादा किया गया है। नेता के रूप में नेहरू की लोकप्रियता आश्चर्यजनक थी, वे एक सफल लेखक थे और उन्होंने कारावास में काटे वर्षों की लम्बी अवधि में उत्कृष्ट ग्रंथों की रचना की। हमारी दृष्टि में नेहरू एक नायक हैं और विश्व के लिए वे एक विद्वान राजनेता थे।

वे आधुनिक भारत के निर्माता हैं। उन्होंने औपनिवेशिक दासता से उभरे देश में उत्कृष्ट संस्थानों, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, परमाणु विज्ञान, अन्तरिक्ष विज्ञान आदि जैसे संस्थानों की स्थापना की। उनका स्वप्न था कि एक आधुनिक भारत का निर्माण हो। इसी कारण से हम उन्हें अपने महान राष्ट्र के निर्माता के रूप में सम्मान देते हैं।

इन्हीं संस्थाओं ने आज के भारत की सफलता की गाथा लिखी है।

नेहरू मानते थे कि आज़ादी सभी लोगों को मिलनी चाहिए। उन्होंने साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद दोनों के खिलाफ संघर्ष किया और एशिया तथा अफ्रीका में चल रहे आज़ादी के लिए आन्दोलनों और स्वतंत्रता संघर्षों का सक्रियता से समर्थन किया। नेल्सन मंडेला के शब्दों में “जवाहरलाल नेहरू एक उत्कृष्ट विद्वान और लेखक, उपनिवेशवाद के विरुद्ध एक जुझारू स्वतंत्रता सेनानी, अफ्रीका-एशिया की एकता और गुटनिरपेक्षता की नीति के अग्रणी योजनाकार थे। नस्लभेद के निकृष्टतम रूप – रंगभेद के खिलाफ़ सभी दक्षिण अफ्रीका वासियों के संघर्ष में वे एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में शामिल हैं।”

इसलिए हमें प्रसन्नता है कि उनके निकट सहयोगी, कैदी के रुप में साथी रहे रॉबेन आइलैंड और अहमद कथरादा इस अवसर पर हमारे साथ हैं।

नेहरू की विरासत मानव जाति के लिए बहुमूल्य है और आज के हमारे विश्व में उनके सिद्धान्तों की प्रासंगिकता चिरस्थायी है। भारत के बारे में उनके दृष्टिकोण पर हम कोई समझौता नहीं कर सकते हैं।

आपने कांग्रेस अध्यक्ष के आमंत्रण को स्वीकार करके अपनी उपस्थिति से हमारा सम्मान बढ़ाया है जिसके लिए हम आपके आभारी हैं, और महामहिमो, दुनियाभर से पधारे नेतागण, हम आपके ज्ञानवर्धक योगदान के लिए सहर्ष प्रतीक्षारत हैं।

धन्यवाद।